<p style="text-align: justify;"><strong>Mahatma Gandhi Jayanti:</strong> विवेक जब शून्य हो जाता है, तब व्यक्ति भीड़ का हिस्सा बन जाता है, और ऐसी विवेक-शून्य भीड़ क्या कुछ करती है, आज के इस दौर में यह बताने की जरूरत शायद नहीं रह गई है. आज से सवा सौ साल पहले मोहनदास करमचंद गांधी
from home https://ift.tt/2mpzuFt
from home https://ift.tt/2mpzuFt
Comments
Post a Comment