Skip to main content

विरोध प्रदर्शनों के बीच पटरी पर लौट रही जिंदगी, नजरें अब सुप्रीम कोर्ट पर; लोगों को 30 साल पुराना आंदोलन याद आ रहा

गुवाहाटी. नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ 11 और 12 दिसंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों के कई दिनों बाद असम में जिंदगी पटरी पर लौट रही है। यहां स्कूल-कॉलेज, दफ्तर और दुकानें खुल चुके हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में सरकारी और निजी बसें दौड़ रही हैं। गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के बाद मोबाइल इंटरनेट और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी भी फिर से शुरू कर दी गई है। हालांकि, घबराहट का माहौल अभी भी है। लोगों की नजरें सुप्रीम कोर्ट में 22 जनवरी को सीएए की संवैधानिक वैधता पर होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। फिलहाल शहर में जगह-जगह दीवारोंपर "नो सीएए" के नारे लिखे दिखाई दे रहे हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी हो रहे हैं। सुरक्षाकर्मी भी हर जगह तैनात हैं। इस माहौल में लोगों को 80 के दशक का वो दौर भी याद आ रहा है, जब यहां अवैध प्रवासियों के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ था। 6 साल तक चले इस आंदोलन में 800 लोगों की मौत हुई थी।

प्रदर्शन के दौरान 5 की मौत, पुलिस ने 250 से ज्यादा मामले दर्ज किए
संसद से नागरिकता संशोधन बिल 11 दिसंबरको पास हुआ था। इसके बाद असम में इसके खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुआ। इनमें 5 की मौत हुई थी। 75 नागरिक और 60 पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे। प्रदर्शनों के दौरान 250 से ज्यादा मामले दर्ज हुए। 420 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 1000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। सोशल मीडिया से जुड़े 31 मामले भी दर्ज किए गए और 10 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई। लोगों ने पुलिस की ज्यादती की भी शिकायत की। एनआईए, असम सीआईडी और गुवाहाटी सिटी क्राइम ब्रांच सहित कई एजेंसियां हिंसा के पीछे साजिश से जुड़े तीन मामलों की भी जांच कर रही हैं। इनमें से एक केस में हिंसा भड़काने केपीछे माओवादियों की साजिश की जांच एनआईए कर रही है।

सीएए-एनआरसी में लिंक नहीं होने के मोदी के दावे पर सवाल उठा रहे युवा
भारत के अन्य हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से यहां का प्रदर्शन बिल्कुल अलग मुद्दे पर है। यहां असम की संस्कृति और भाषाई पहचान बचाने के मुद्दे पर लोग सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक अपनी बात रख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि असम के एनआरसी में बाहर हुए 19 लाख में ज्यादातर हिंदू बांग्लादेशी हैं और सीएए के बाद इन सभी को नागरिकता मिल जाएगी, यानी एनआरसी का कोई मतलब नहीं रहेगा। युवा प्रदर्शनकारी सीएए का एनआरसी से लिंक नहीं होने के प्रधानमंत्री मोदी के दावे पर भी सवाल उठा रहे हैं। सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के साथ-साथ ये लोग अपने किसान नेता अखिल गोगोई को रिहा करने की मांग भी कर रहे हैं। गोगोई को एनआईए ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं और यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत गिरफ्तार किया है।

सभी की नजरें जनवरी में होने वाली दो अहम सुनवाइयों पर
1979 में अवैध प्रवासियों के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाला और 1985 में हुए असम समझौते में बड़ी भूमिका निभाने वालासंगठन “ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू)” संसद से सीएए के पास होने के कुछ समय तक शांत था, लेकिन अब यह डिब्रुगढ़, तेजपुर और राज्य के अन्य हिस्सों में लोगों को बड़ी संख्या में एकजुट कर रैलियां कर रहा है। संगठन का कहना है कि सीएए अवैध बांग्लादेशियों को नागरिकता देगा, यह ऐतिहासिक असम समझौते का उल्लंघन है। यह असंवैधानिक और सांप्रदायिक होने के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों के खिलाफ भी है। अन्य संगठनों और कार्यकर्ताओं की तरह ही आसू की नजर भी एनआरसी करेक्शन के मुद्दे पर 6 जनवरी को होने वाली सुनवाई और सीएए की संवैधानिक वैधता पर 22 जनवरी को होने वाली सुनवाई पर है।

एनआरसी की अंतिम सूची से भी खुश नहीं : लुरिनज्योति गोगोई
आसू के जनरल सेक्रेटरी लूरिनज्योति गोगोई का कहना है कि हमारे पास विरोध के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है। हम सीएए के खिलाफ हैं और एनआरसी की अंतिस सूची से भी खुश नहीं हैं। एनआरसी भारतीय नागरिकों की सूची है और सीएए विदेशियों के लिए है। ये दोनों एकदूसरे से जुड़े हुए हैं। सीएए असम में एनआरसी प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों की हो रही काउंसलिंंग
असम के एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) जीपी सिंह का कहना है कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति है, लेकिन अगर ये हिंसक हो जाते हैं, तो इन्हें सजा भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर हम नजर रख रहे हैं। भड़काऊ पोस्ट के ज्यादातर मामलों में हमने ऐसे इलाकों के परिवारों और लोगों को बुलाकर उनकी काउंसलिंग की है। कई भड़काऊ पोस्ट को हटाया गया है। लोगों को पोस्ट डालने और संदेशों को आगे बढ़ाने में सतर्कता रखने को कहा गया है।

  • स्मिता शर्मा सीनियर जर्नलिस्ट हैं (Twitter : @Smita_Sharma)


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Guwahati CAA protest | Assam CAA Protest News Ground Report ; Citizenship Act CAA Protests Today News From Assam's Guwahati


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/37mMptx

Comments

Popular posts from this blog

कोरोनावायरस के हमले पर कैसे रिएक्ट करता है हमारा शरीर? वैक्सीन की जरूरत क्यों?

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित किया है। जनवरी में यह चीन से बाहर फैला और धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। जान बचाने के खातिर हर स्तर पर कोशिशें तेज हो गईं। करीब 11 महीने बाद भी रिकवरी की हर कोशिश को कोरोना ने नई और ताकतवर लहर के साथ जमींदोज किया है। ऐसे में महामारी को रोकने के लिए सिर्फ वैक्सीन से उम्मीदें हैं। पूरी दुनिया में वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। जब दुनियाभर में वैज्ञानिक कोरोनावायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हैं तो यह जानना तो बनता है कि इसकी जरूरत क्या है? मेडिकल साइंस को समझना बेहद मुश्किल है। आसान होता तो हर दूसरा आदमी डॉक्टर बन चुका होता। हमने विशेषज्ञों से समझने की कोशिश की कि कोरोनावायरस शरीर पर कैसे हमला करता है? उस पर शरीर का जवाब क्या होता है? वैक्सीन की जरूरत क्यों है? वैक्सीन कैसे बन रहा है? यहां आप 5 प्रश्नों के जवाब के जरिए जानेंगे कि - कोरोनावायरस के हमले पर शरीर का रिस्पॉन्स क्या होता है? कोरोनावायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन की जरूरत क्या है? किस तरह से वैक्सीन बनाए जा रहे हैं? वैक्सीन के ...

मर्द का चरित्र है कि उसे किसी मर्द से दिक्कत हो, तो वो उसकी मां-बहन-बेटी को निशाना बनाता है, चाहे वो 5 साल की मासूम क्यों न हो

इंटरनेट पर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की पांच साल की बेटी को रेप की धमकियां मिल रही हैं। वजह? क्योंकि उस नन्ही बच्ची के पिता की टीम आईपीएल मैच में हार गई। लोग धोनी से गुस्सा हैं, लेकिन निकाल उनकी पांच साल की बेटी पर रहे हैं। इंटरनेट पर इस खबर के बाद मैं अगली खबर पर पहुंचती हूं। गुजरात में एक 12 साल की बच्ची रेप के बाद प्रेग्नेंट हो गई। फिर तीसरी खबर दिखाई देती है, गुजरात में एक 44 साल के आदमी ने 3 नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार किया। फिर चौथी खबर, छत्तीसगढ़ में बलात्कार का शिकार नाबालिग बच्ची की मौत। पांचवी खबर केरल में 10 साल की बच्ची के साथ रेप। यूं तो इन सारी खबरों का आपस में कोई रिश्ता नहीं, लेकिन एक ही तार से मानो सब जुड़ी हैं। हर वो मनुष्य, जिसने आपके मुल्क में स्त्री की देह में जन्म लिया है, वो सुरक्षित नहीं। वो हर वक्त आपके निशाने पर है। लोगों ने पांच साल की बच्ची के लिए जैसी भाषा और शब्दों का इस्तेमाल किया है, सोचकर ही मेरे हाथ कांप रहे हैं। मैं कल्पना कर रही हूं उस नन्ही जान की, जो इस वक्त आइसक्रीम और गुब्बारे के लिए जमीन पर लोट रही होगी। झूठ-मूठ नाराज होने का नाटक कर रही...