Skip to main content

नई दिल्ली सीट ने 5 मुख्यमंत्री दिए; फ्री बिजली से लोग खुश, गंदगी और सुरक्षा यहां बड़े मुद्दे

नई दिल्ली. अरविंद केजरीवाल लगातार तीसरी बार नई दिल्ली सीट से मैदान में हैं। यह सीट दो मुख्यमंत्रियों को कुल पांच कार्यकाल दे चुकी है। कांग्रेस की शीला दीक्षित यहां से तीन बार जीतीं। तीनों ही बार सीएम बनीं। केजरीवाल 2013 और 2015 में जीते। दोनों ही बार मुख्यमंत्री बने। इस बार जीते तो वे शीला के रिकॉर्ड की बराबरी करेंगे। भाजपा से सुनील यादव और कांग्रेस से रोमेश सभरवाल अरविंद के सामने मुख्य चुनौती हैं। नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की जमीनी हकीकत और मुद्दों को समझने के लिए दैनिक भास्कर टीम ने हालात का जायजा लिया। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट।

नलों में गंदा पानी, पैदल चलने की जगह नहीं
पहाड़गंज। संकरे रास्ते से गुजरते हुए हम राजेंद्र मौर्य की मिठाई की दुकान पर रुकते हैं। केजरीवाल सरकार के कामकाज पर उनका रुख अपनी मिठाइयों की तरह मीठा नहीं लगता। राजेंद्र कहते हैं, “बिजली में कुछ राहत है। लेकिन, फ्री के नाम पर बहुत गंदा पानी दिया जा रहा है। इसे फिल्टर किए बिना पीना संभव नहीं। सुबह पांच बजे उठो तो पानी मिलेगा, अन्यथा नहीं। पूरी दिल्ली में सीसीटीवी लगाने का वादा था। देशराज भाटिया जैसे मेन रोड पर एक भी सीसीटीवी नहीं है।” चंद कदमों के फासले पर राजेश यादव की दुकान है। कहते हैं, “सर्विस रोड पर दुकानदारों के कब्जे हैं। हम पैदल नहीं चल सकते तो ग्राहक कैसे आएंगे? सब दादा-पहलवान हैं। सरकार को कुछ नहीं दिखता। इसलिए कार्रवाई भी नहीं होती।”

रियायत सिर्फ एक खास तबके तक सीमित
सुरेंद्र सिंह सोढ़ी 60 साल से पहाड़गंज में हैं। उनकी प्रतिक्रिया संतुलित है। कहते हैं, “बिजली-पानी और सफाई के हालात सुधरे हैं। जीएसटी ने धंधा तबाह कर दिया। कुल मिलाकर ठीक काम हुआ।” चाय-नाश्ते की दुकान से आजीविका चला रहे सुरेंदर कहते हैं, “इस सरकार ने लोगों को मूर्ख बनाने के अलावा कोई काम नहीं किया। आप ही देख लीजिए। सीवर लाइन सड़ चुकी है। सीसीटीवी लगे नहीं। रियायत तो एक खास तबके को दी है। हम हर महीने 10 हजार रुपए बिजली बिल देते हैं।”

मोहल्ला क्लीनिक अच्छे, लेकिन वहां हर बीमारी की एक ही दवा
मेन मार्केट से कुछ दूरी पर मुल्तानी ढांडा बस्ती। यहां चुलु देवी मिलती हैं। सरकार के कामकाज पर कहती हैं, “पानी, बिजली और मोहल्ला क्लीनिक की सुविधाएं अच्छी हैं। जाति प्रमाण पत्र हासिल करने में दिक्कत है। अधिकारी पुरखों के कागज मांगते हैं। गंदगी बहुत है। सांस लेना मुश्किल लेकिन सफाई नहीं होती।” यहीं पुष्पा देवी से मुलाकात होती है। वे कहती हैं, “घर के सामने ही डिस्पेंसरी है। इलाज तो फ्री हो जाता है लेकिन ज्यादातर बीमारियों के लिए वो एक ही दवा देते हैं। उनके पास ज्यादा दवाईयां नहीं। सरकार इस पर ध्यान नहीं देती।”

सरकार की योजनाएं सिर्फ चुनावी वादे
कनॉट प्लेस। यहां महेश गुप्ता पान की दुकान चलाते हैं। केजरीवाल सरकार से खफा हैं। कहते हैं- फ्री के नाम पर लोगों को सिर्फ बेवकूफ बनाया जा रहा है। कॉलोनियों में सड़कें तक नहीं हैं। हम शंकर मार्केट पहुंचते हैं। घनश्याम पाराशर स्वादिष्ट राजमा-चावल की दुकान के मालिक हैं। लेकिन, दिल्ली सरकार की बात करते हैं तो जैसे उनका जायका बिगड़ जाता है। कहते हैं, “केजरीवाल ने साढ़े चार साल कुछ नहीं किया। 6 महीने पहले तमाम घोषणाएं कर दीं। और ये भी सिर्फ चुनावी वादे हैं। आगे कुछ नहीं होगा।”

बसों में सफर से अब डर नहीं लगता
हम थॉमस रोड पहुंचते हैं तो यहां आशा मिलती हैं। सरकार से खुश हैं। कहती हैं, “स्कूल अच्छे हो गए हैं। बसों में मार्शल हैं तो अब सफर में डर नहीं लगता। किराए के पैसे भी बच जाते हैं।” यहां कुछ सरकारी मकान हैं। लता इन्हीं में से एक में रहती हैं। वे कहती हैं, “बिजली के बिल पर हमें कोई राहत नहीं क्योंकि हमारा बिल अलग आता है। बसों में मार्शल तैनात करना अच्छी पहल है लेकिन ये कॉलोनियों में भी होने चाहिए।”



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Arvind Kejriwal Delhi Election 2020 | Delhi Vidhan Sabha Chunav Bhaskar Ground Report; New Delhi Seat BJP Congress AAP, Arvind Kejriwal Electricity Scheme


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2O7MPx3

Comments

Popular posts from this blog

कोरोनावायरस के हमले पर कैसे रिएक्ट करता है हमारा शरीर? वैक्सीन की जरूरत क्यों?

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित किया है। जनवरी में यह चीन से बाहर फैला और धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। जान बचाने के खातिर हर स्तर पर कोशिशें तेज हो गईं। करीब 11 महीने बाद भी रिकवरी की हर कोशिश को कोरोना ने नई और ताकतवर लहर के साथ जमींदोज किया है। ऐसे में महामारी को रोकने के लिए सिर्फ वैक्सीन से उम्मीदें हैं। पूरी दुनिया में वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। जब दुनियाभर में वैज्ञानिक कोरोनावायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हैं तो यह जानना तो बनता है कि इसकी जरूरत क्या है? मेडिकल साइंस को समझना बेहद मुश्किल है। आसान होता तो हर दूसरा आदमी डॉक्टर बन चुका होता। हमने विशेषज्ञों से समझने की कोशिश की कि कोरोनावायरस शरीर पर कैसे हमला करता है? उस पर शरीर का जवाब क्या होता है? वैक्सीन की जरूरत क्यों है? वैक्सीन कैसे बन रहा है? यहां आप 5 प्रश्नों के जवाब के जरिए जानेंगे कि - कोरोनावायरस के हमले पर शरीर का रिस्पॉन्स क्या होता है? कोरोनावायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन की जरूरत क्या है? किस तरह से वैक्सीन बनाए जा रहे हैं? वैक्सीन के ...

मर्द का चरित्र है कि उसे किसी मर्द से दिक्कत हो, तो वो उसकी मां-बहन-बेटी को निशाना बनाता है, चाहे वो 5 साल की मासूम क्यों न हो

इंटरनेट पर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की पांच साल की बेटी को रेप की धमकियां मिल रही हैं। वजह? क्योंकि उस नन्ही बच्ची के पिता की टीम आईपीएल मैच में हार गई। लोग धोनी से गुस्सा हैं, लेकिन निकाल उनकी पांच साल की बेटी पर रहे हैं। इंटरनेट पर इस खबर के बाद मैं अगली खबर पर पहुंचती हूं। गुजरात में एक 12 साल की बच्ची रेप के बाद प्रेग्नेंट हो गई। फिर तीसरी खबर दिखाई देती है, गुजरात में एक 44 साल के आदमी ने 3 नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार किया। फिर चौथी खबर, छत्तीसगढ़ में बलात्कार का शिकार नाबालिग बच्ची की मौत। पांचवी खबर केरल में 10 साल की बच्ची के साथ रेप। यूं तो इन सारी खबरों का आपस में कोई रिश्ता नहीं, लेकिन एक ही तार से मानो सब जुड़ी हैं। हर वो मनुष्य, जिसने आपके मुल्क में स्त्री की देह में जन्म लिया है, वो सुरक्षित नहीं। वो हर वक्त आपके निशाने पर है। लोगों ने पांच साल की बच्ची के लिए जैसी भाषा और शब्दों का इस्तेमाल किया है, सोचकर ही मेरे हाथ कांप रहे हैं। मैं कल्पना कर रही हूं उस नन्ही जान की, जो इस वक्त आइसक्रीम और गुब्बारे के लिए जमीन पर लोट रही होगी। झूठ-मूठ नाराज होने का नाटक कर रही...