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गर्दन फंसी हुई है सिर में, सिर पर कैक्टस उगे हुए हैं...

कोरोना के कारण जब यहां-वहां बसे मज़दूर अपने घरों को लौट रहे थे, हृदय विदारक दृश्य था। दर्द सड़कों पर बह रहा था। दुखों की कहानियां कह- कहकर लोग थक चुके थे। लोगों ने लाशें देखी थीं। लाशों जैसे लोग देखे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में इस दुख को कम करने की कोशिश की। ग़रीबों को मिलने वाले मुफ़्त अनाज की मियाद पांच महीने बढ़ा दी। बड़ी चतुराई के साथ इस मियाद के आखिरी दिनों को छठ पूजा से जोड़ा भी।

गमछा और छठ पूजा सीधे बिहार से जुड़ते हैं और बिहार में चुनाव होने वाले हैं। अब राष्ट्र के नाम संदेश को कोई चुनावी न कह दे इसलिए सावधानी बरती। घोषणा से पहले कई त्योहारों के नाम गिना दिए ताकि बाद में समीक्षा के वक्त छठ पूजा को लेकर होने वाले बवाल के जवाब में उनकी पार्टी के प्रवक्ताओं को सहूलियत रहे। सही है, ग़रीबों की मदद करनी ही चाहिए। हर हाल में करनी चाहिए लेकिन जब ये ही लोग सड़कों पर मर रहे थे, तब सरकार कहां थी? ठीक है, प्रधानमंत्री ने ग़रीबी भोगी है। इसलिए ग़रीबों की हालत को अच्छी तरह जानते- समझते हैं। लेकिन मध्यम वर्ग भी तो इसी देश में रहता है। उसके बारे में कौन
सोचेगा? आपकी वित्त मंत्री कहती हैं मध्यम वर्ग अपनी मदद खुद कर लेगा। आप इस बात पर भी मुस्कुराते रहते हैं।

मध्यम वर्ग पर भी कोरोना की भारी मार पड़ी है। उनके वेतन कम हो गए। उनकी नौकरियां चली गईं। ... और आप से इतना भी नहीं हुआ कि सबसे सस्ते फ्यूल के इस समय में कम से कम पेट्रोल-डीज़ल के दाम ही कम कर देते! वेतन कटौती के इस दौर में इनकम टैक्स के स्लैब ही कुछ लचीले कर देते!
लोग उम्मीद कर रहे थे कि प्रधानमंत्री चीन पर कुछ बोलेंगे। कुछ को यह भी संभावना थी कि शायद कोरोना वैक्सीन के बारे में कोई घोषणा करेंगे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। केवल एक अनाज योजना की मियाद बढ़ाने के लिए राष्ट्र के नाम संदेश का आयोजन हुआ। निश्चित रूप से ऐसा होने में कुछ छिपे हुए संदेश भी रहे होंगे। वे बिहार चुनाव के बारे में भी हो सकते हैं और मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर होने जा रहे उपचुनावों के बारे में भी हो सकते हैं।
बहरहाल मामला गड्डमड्ड है। सरकार क्या कहती है और क्या करना चाहती है, इसमें काफ़ी फर्क है। लोगों को भ्रम में डाला जा रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि हमें भ्रम में रहना अच्छा लगता है। भ्रम पर भ्रम ऐसा कि मोदी के राष्ट्र के नाम संदेश के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की कि उनके प्रदेश में ग़रीबों को जून 2021 तक मुफ़्त अनाज दिया जाएगा। कुल मिलाकर भ्रम पर भ्रम... ये ही अब हमारी दिनचर्या है। शायद ये ही जिंदगी भी! मध्यम वर्ग के हाल पर याद आते हैं गुलज़ार...

सारे बदन पर पित्त निकली है,
हाथ खुजाते हैं पैरों को, पैर खुजाते हैं गर्दन।
गर्दन फंसी हुई है सिर में,
सिर पर कैक्टस उगे हुए हैं।



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नवनीत गुर्जर, नेशनल एडिटर दैनिक भास्कर


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