जीवन में जब भी कोई विपरीत परिस्थिति आए, रामजी की तरह इंद्रियों पर नियंत्रण और ईश्वर के प्रति भरोसा जरूर बनाए रखिएगा
जीवन में संकट किसी पर भी आ सकता है। देखिएगा, जब भी कोई विपरीत परिस्थिति आती है, हम किसी दिक्कत में होते हैं तो हमारे प्रति लोगों का व्यवहार चार तरीके का रहता है- सहानुभूति, सलाह, सहयोग और आलोचना। हमें संकट में पड़ा देखकर कभी-कभी लोग यह भी कह सकते हैं कि हमने तो पहले ही कहा था, आप ही ने ध्यान नहीं दिया। ऐसे समय दो बातें न छोड़ें- भगवान पर भरोसा और इंद्रियों पर नियंत्रण।
संकट रामजी पर भी आया था। रावण से युद्ध के समय उन्हें पैदल देख देवताओं ने अपना रथ भेजा, जिसमें देवलोक के घोड़े जुते हुए थे। उन घोड़ों के लिए तुलसीदासजी ने लिखा है- ‘चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।’ रामजी जिस रथ पर चढ़े उसके चारों घोड़े बड़े चंचल, मनोहर, अजर-अमर और मन की गति के समान चलने वाले थे। इंद्रियों को घोड़े जैसा बताया गया है।
यहां तुलसीदासजी ने इंद्रियों के लक्षण बताए हैं कि वे चंचल होती हैं, अक्षय, अमर और मन की गति से भागती हैं। देखिए, घोड़े, इंद्रियां, मन इन सबको जोड़ दिया गया है और रामजी ने इनका उपयोग युद्ध के समय हंसते हुए किया। यह पूरी घटना, पूरा दृश्य हमें बताता है कि जीवन में जब भी कोई विपरीत परिस्थिति आए, रामजी की तरह इंद्रियों पर नियंत्रण और ईश्वर के प्रति भरोसा जरूर बनाए रखिएगा।
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