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गुजिश्ता जंग में तो घर बार ही जले, अजब नहीं ये तनहाइयां भी जल जाएं, गुजिश्ता जंग में तो पैकर ही जले, अजब नहीं इस बार परछाइयां भी जल जाएं

एक सितंबर 1939 को दूसरे विश्वयुद्ध का प्रारंभ हुआ। ज्ञातव्य है 1929 से 1933 वैश्विक आर्थिक मंदी का भयावह दौर था। इसी दौर में हिटलर ने जर्मनी में हथियार बनाने के कारखाने खोले व लोगों को काम मिला। हिटलर के प्रचार मंत्री गोएबल्स ने कहा कि एक झूठ को सौ बार कहने से अवाम को वह सच लगने लगता है। मंदी में नौकरियां देने से हिटलर की लोकप्रियता बढ़ी।

इस विश्वयुद्ध में अमेरिका का धन लगा, इंग्लैंड के विंस्टन चर्चिल ने नीतियां बनाईं व युद्ध में सबसे अधिक संख्या में रूसी सैनिक मरे। पर युद्ध में पोलैंड ने निर्णायक भूमिका अदा की। हिटलर को लगा कि नन्हें पोलैंड वह सप्ताह में परास्त करके, फौज रूस की ओर बढ़ेगी। परंतु पोलैंड के नागरिकों ने मोहल्ला दर मोहल्ला युद्ध कर उसे 11 सप्ताह में परास्त किया। इसी कारण हिटलर की सेना और उस पर आक्रमण करने में देर हुई और भयावह रूसी सर्दी में हिटलर की सेना फंस गई। रूस में ‘बेलाड ऑफ ए सोल्जर’ और ‘क्रेन्स आर फ्लाइंग’ जैसी महान फिल्में बनीं।

‘बेलाड ऑफ ए सोल्जर’ के नायक को सरहद पर विशेष साहस प्रदर्शन से इनाम में 1 सप्ताह की छुट्टी मिली। साथी उससे उनके परिवारों की खोज खबर लेने की प्रार्थना करते हैं। यात्रा में वह सभी ओर तबाही देखता है। यात्रा में वह देखता है कि शत्रु के बराबर की तबाही उनके खुदके शहरों की भी हुई है। उसे गहरा आघात लगता है, जब वह अपने उस साथी का पत्र उसकी पत्नी को देने जाता है, जिसके प्रेम पर साथी को गर्व था, तो साथी की पत्नी पेट की आग बुझाने के लिए अपने शरीर का व्यापार करने के लिए मजबूर हो चुकी है।

इंग्लैंड के नागरिकों ने युद्ध समय के अपने प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की प्रशंसा की परंतु युद्ध के बाद हुए आम चुनाव में उसे हराकर उदारवादी एटली को मत दिया। एटली ने ही भारत की स्वतंत्रता की मांग स्वीकार की थी। चर्चिल तो गांधी जी को नंगा फकीर कहते थे। ईवा ब्रॉउन हिटलर से प्रेम करती थी। हिटलर शारीरिक लोचे के शिकार थे। प्राय: तानाशाह ऐसे ही होते हैं। उनमें प्रेम करने का माद्दा ही नहीं होता। हिटलर जान गए कि वे युद्ध हार रहे हैं। इसलिए अब एक बंकर में रहते थे।

आत्महत्या करने के कुछ समय पूर्व ही उन्होंने ईवा से विवाह किया था। दोनों ने ही साथ ही आत्महत्या की। वर्तमान में हमें यह याद रखना है कि जिस वैश्विक मंदी के कारण हिटलर को लोकप्रिय होने का अवसर मिला, वैसी वैश्विक मंदी हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रही है। कई दशक पूर्व अर्थशास्त्र के विशेषज्ञों ने इसकी भविष्यवाणी की थी। आज अतिरेक से बचना और बचत करना मानव धर्म बन चुका है।

दूसरे विश्व युद्ध के आखिर में अमेरिका ने हिरोशिमा-नागासाकी पर आण्विक बम गिराए, जिसके दुष्प्रभाव पीढ़ियों तक जारी रहते हैं। अमेरिकन फिल्म ‘सेविंग ऑफ रियान’ में प्रस्तुत किया गया है। परिवार के सभी युवा सेना में भर्ती होते रहे हैं और इस महान परिवार के आखिरी सदस्य को बचाना उस महान वंश को बचाने का काम है। भारत में गरीब परिवारों के युवा सेना में भर्ती होते हैं। कभी किसी नेता या उद्योगपति का पुत्र सेना में नहीं गया।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद बर्लिन का एक हिस्सा रूस और दूसरा अमेरिका को मिला।

शहर के बीच दीवार बना दी गई। अमेरिका के हवाई जहाज पश्चिम बर्लिन में जीवन उपयोगी चीजें पहुंचाते रहे। कालांतर में दीवार तोड़ दी गई। तमाम बंटवारे की दीवारें तोड़ दी जाती हैं। मगर नफरत फैलाकर सत्ता में बने रहने वाले नई दीवारें बना रहे हैं। अवाम भी इसे पसंद कर रहा है। भविष्य में इसके भयावह परिणाम होंगे।

युद्ध की भयावता के बारे में साहिर लुधियानवी कहते हैं, ‘गुजिश्ता जंग में तो घर बार ही जले, अजब नहीं ये तनहाइयां भी जल जाएं, गुजिश्ता जंग में तो पैकर (शरीर) ही जले, अजब नहीं इस बार परछाइयां भी जल जाएं।



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जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक


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