बात बराबरी की:अजी...मूंछें, मांसपेशियां और मोबाइल तो मर्दाना शान हैं, लड़कियां भला इसका क्या करेंगी?
मोबाइल थामी लड़कियों के हाथ लरज रहे हैं कि कहीं घर वाले उन पर शक तो नहीं कर रहे,फोन पर खिलखिलाती लड़कियों की हंसी जैसे खतरे की सुई हो, जो किसी भी समय दायरा पार कर डालेगी
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