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Showing posts from August, 2020

फांसी के डीआईवाई से लेकर इस ‘सख्त’ इंटरव्यू तक…सरोकारों वाली यह पत्रकारिता इतिहास याद रखेगा

सैकड़ों स्टिंग। हजारों खुलासे। केस का पूरा सच सामने ला देने वाली एक-एक दिन में कई-कई ब्रेकिंग न्यूज। टेलीविजन की सरोकारों वाली इस पत्रकारिता को इतिहास याद रखेगा। देश के लिए यह अभूतपूर्व योगदान है। कुछ चैनलों के तो नाम में ही भारत, हिंदुस्तान, इंडिया निहित हैं। वे जो करते हैं वह राष्ट्र के नाम होता है। अमेरिकी टेलीविजन चैनलों ने अभिनेता और फुटबाल खिलाड़ी ओ. जे. सिंपसन मामले में खूब खबरें की थीं, लेकिन उन्हें भी हर दिन केस की ‘दिशा बदल देने वाली’ ब्रेकिंग नहीं मिला करती थीं। आपने इतिहास बनाया है। किसी स्टोरी में पांच डब्ल्यू, एक एच ढूंढना पत्रकार को पेशे में आते ही सिखाया जाता है। आपने सुशांत केस में हजारों डब्ल्यू, सैकड़ों एच ढूंढे। और हां, ‘कौन’ वाले डब्ल्यू में तो आपने पहले दिन से ही दर्शक को बता दिया था-ध्यान से देखिए इस मासूम चेहरे को...यही है वो। इस केस के लिए किसी ने दो, किसी ने पांच किसी ने बारह संवाददाता तैनात किए। आप सबकी टीमों को जोड़ दें तो देश में किसी केस के लिए गठित यह अब तक की सबसे बड़ी जांच टीम है। सबसे गहरा काम आपकी फोरेंसिक टीम, माफ़ करें रिपोर्टिंग टीम ने क्राइम सीन ...

देसी ट्विटर 'कू' की कहानी, ये अंग्रेजी नहीं जानने वालों का प्लेटफॉर्म; इसे बनाने वाले कभी देश की बड़ी कैब सर्विस के मालिक थे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार मन की बात में ‘आत्मनिर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज’ के बारे में बात की। इसमें उन्होंने माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू (KOO) का जिक्र किया। ये एक तरह का देसी ट्विटर है। इसमें आप भारतीय भाषाओं में अपने विचार लिख सकते हैं। आज की पॉजिटिव स्टोरी में इसी ऐप की कहानी, जो बताती है कि इस देश की विविधता को ध्यान में रखकर प्लान किया गया आइडिया आपको सफलता दिला सकता है। सबसे पहले बात उस चैलेंज की जिसका जिक्र पीएम मोदी ने किया। दरअसल, 15-16 जून को भारत-चीन झड़प के बाद तनाव की बीच देश में कई चीनी ऐप्स पर बैन लगाया गया। इसी बीच प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत चार जुलाई को ‘ऐप इनोवेशन चैलेंज’ लॉन्च किया। आठ कैटेगरी में करीब सात हजार एंट्री आईं। इनमें से दो दर्जन ऐप्स को अवॉर्ड दिया गया। माइक्रो ब्लॉगिंग ऐप कू भी विजेताओं में शामिल था। बात ‘कू’ को बनाने वाले आइडिया की इसे बनाने वाली कंपनी कहती है कि हमारे देश में केवल 10% लोग ऐसे हैं जो अंग्रेजी बोलते हैं। देश की 138 करोड़ आबादी में करीब सौ करोड़ लोग हैं, जो अंग्रेजी नहीं जानते हैं। ये लोग देश की सैकड़...

चीन का सामना करने के लिए अमेरिका को जर्मनी के साथ साझेदारी करनी चाहिए

अगर जो बाइडेन राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो उनकी सबसे बड़ी विदेश नीति चुनौती चीन होगा। लेकिन यह वह चीन नहीं होगा जिसका सामना उन्होंने बराक ओबामा के साथ किया था। यह ज्यादा आक्रामक चीन होगा, जो अमेरिका के तकनीक में प्रभुत्व को उखाड़ना चाहेगा, हांगकांग मे लोकतंत्र का दम घोंटेगा और आपका निजी डेटा चुराएगा। वैश्विक व्यापार तंत्र को बिगाड़े बिना चीन को दबाने के लिए जर्मनी के साथ साझेदारी की जरूरत पड़ेगी, जिसे बनाने में ट्रम्प असफल रहे हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा? सोवियत संघ के साथ शीत युद्ध बर्लिन में लड़ा और जीता गया। और चीन के साथ भी व्यापार, तकनीक और वैश्विक प्रभाव पर शीत युद्ध बर्लिन में लड़ा और जीता जाएगा। जैसा बर्लिन करता है, वैसा ही जर्मनी करता है और जैसा जर्मनी करता है, वैसा ही यूरोपियन संघ करता है, जोकि दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल मार्केट है। और जो भी देश यूरोपियन संघ को अपनी तरफ कर लेगा, वहीं 21वीं सदी में डिजिटल कॉमर्स के नियम तय करेगा। चीन का सामना करने के लिए गठबंधन जरूरी ‘द राइज एंड फाल ऑफ पीस ऑन अर्थ’ के लेखक माइकल मंडेलबॉम कहते हैं, ‘पहले और दूसरे विश्वयुद्ध तथा शीत युद्ध में अमेरिका ...

यह शर्मिंदगी की बात है कि देश के छात्र असमंजस में हैं, महामारी और लॉकडाउन ने उनके सपनों को पीछे धकेल दिया है

कोरोना की वजह से छात्र समुदाय बहुत परेशान है। अपनी शिक्षा पर बहुत समय, मेहनत और पैसा खर्च करने के बाद उन्हें अपनी योजनाएं बिगड़ती दिख रही हैं। साथ भी भविष्य अनिश्चित हो गया है। महामारी और फिर लॉकडाउन ने उनके सपनों को पीछे धकेल दिया है। ऐसे में उन्हें इस असमंजस में डालना और भी बुरा है कि वे सेहत चुनें या अपना अकादमिक भविष्य। शर्मिंदगी की बात है कि अभी इसी स्थिति का सामना नेशनल एलिजिबिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) और जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) की तैयारी कर रहे छात्रों को करना पड़ रहा है, जिनकी परीक्षाएं इस महीने होनी हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि अभी भीड़ से बचना चाहिए नीट और जेईई पहले अप्रैल और मई में होनी थीं, लेकिन दो बार आगे बढ़ाई जा चुकी हैं। इसका मतलब सरकार ने सोचा कि जब भारत में 50 हजार कोरोना मरीज थे, तब इन बड़ी परीक्षाओं को आगे बढ़ाना सही था, लेकिन अब जब कोरोना के मामले 36 लाख के पार जा चुके हैं, सरकार को परीक्षा हॉल में हजारों छात्रों की भीड़ इकट्‌ठा करना सही लग रहा है। यह अतार्किक और खतरनाक है। कोविड-19 की वैज्ञानिक समझ कहती है कि मौजूदा स्थिति में बड़े आयोजन नहीं करने चाहिए, भीड़ स...

दुष्यंत कुमार का जन्मदिन; दूसरे विश्वयुद्ध की 81 साल पहले शुरुआत; एलआईसी ने शुरू किया था काम

आज ही के दिन 1933 में उत्तरप्रदेश के बिजनौर में मशहूर कवि और गज़ल लेखक दुष्यंत कुमार का जन्म हुआ था। सिर्फ 42 साल की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हुआ। लेकिन इतनी कम उम्र में भी दुष्यंत ने ऐसी रचनाएं लिखीं कि अमर हो गए। दुष्यंत की रचनाओं की खासियत थी उनका दायरा। कभी तो वे आपातकाल की पृष्ठभूमि में क्रांतिकारी अंदाज में लिखते “कैसे आकाश में सूराख़ हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो', तो कभी रोमांटिक अंदाज में कहते -“तू किसी रेल-सी गुजरती है, मैं किसी पुल-सा थरथराता हूं।” दुष्यंत कुमार या दुष्यंत कुमार त्यागी शुरुआत में दुष्यंत कुमार परदेशी के नाम से लिखा करते थे। भोपाल उनकी कर्मभूमि रही। वे आपातकाल में संस्कृति विभाग में काम करते हुए भी सरकार के खिलाफ लिखते रहे। इसका खामियाजा भी उन्हें उठाना पड़ा। 81 साल पहले दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हुआ 1914 से 1918 तक पहला विश्वयुद्ध हुआ और कई संधियों के साथ खत्म हुआ था। लेकिन कई मुद्दे अनसुलझे थे, जिनकी वजह से अस्थिरता और तनाव कायम था। एक सितंबर 1939 को करीब 15 लाख सैनिकों के साथ एडॉल्फ हिटलर की जर्मन सेना ने पोलैंड पर हमल...

17 साल उम्र थी, गर्मियों वाली टीशर्ट और हाफ पैंट में लद्दाख के लिए निकल गया, जोजिला तक पहुंचे तो जूते फट चुके थे, मजदूरों के टेंट में रात गुजारी

पिछले तीन महीनों में देश में सबसे ज्यादा चर्चा लद्दाख की हुई है। दिल्ली से लद्दाख की दूरी 1 हजार किमी से ज्यादा है। आमतौर पर बाइक पर लद्दाख जाने वाले बहुतेरे हैं। कइयों ने मनाली से श्रीनगर का सफर साइकिल पर भी किया है। लेकिन, पैदल शायद किसी ने नहीं। ये कहानी है दिल्ली के अशोक उप्पल की, जो एक नहीं, बल्कि 2 बार पैदल लद्दाख जा चुके हैं। उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी... 15 से 25 की उम्र, वो उम्र जब दिल में आता है, कुछ भी कर जाओ। 1986 की बात है। कांवड़ यात्रा के लिए मैं पहली बार 200 किमी पैदल चलकर दिल्ली से हरिद्वार गया था। ये पैदल पहली यात्रा थी। इसके बाद वैष्णोदेवी गया। वैष्णोदेवी में बर्फ देखकर हम दोस्त चिल्लाने लगे तो वहां लोगों ने बोला ये क्या कोई बर्फ है? बर्फ ही देखना है तो लद्दाख जाओ। वहां बर्फ से रास्ते बंद रहते हैं। दिल्ली के रहने वाले अशोक उप्पल दो बार पैदल लद्दाख जा चुके हैं। जब वे 17 साल के थे तब से ही यात्रा कर रहे हैं। हमने तय किया, 1987 में कोशिश करेंगे पैदल लद्दाख जाने की। मई में छुटि्टयां थी तो गर्मियों के कपड़े, टीशर्ट और शॉर्ट्स में ही हम तीन दोस्त लद्दाख के लिए निकल ग...

देश में सबसे ज्यादा दलित और मुसलमान कैदी यूपी में और आदिवासी मध्य प्रदेश की जेलों में बंद हैं, कॉमन जेलों में भीड़, लेकिन महिला जेलें खाली

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने साल 2019 के लिए जेल संबंधित एक रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक, देशभर में करीब 4.72 लाख कैदी हैं। इनमें 4.53 लाख पुरुष और 19 हजार 81 महिला कैदी हैं। जिसमें 70 फीसदी तो अंडर ट्रायल हैं, 30 फीसदी ही दोषी हैं। सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में एक लाख कैदी हैं। मध्य प्रदेश में 44 हजार 603 और बिहार में 39 हजार 814 कैदी हैं। 2019 में 18 लाख लोगों को कैद किया गया, जिसमें से 3 लाख लोगों को अभी भी जमानत नहीं मिल सकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दलित, मुस्लिम और आदिवासी कैदियों की संख्या आबादी में उनके अनुपात से कहीं ज्यादा है। 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश में अनुसूचित जाति (एससी) की आबादी 16 फीसदी है, जबकि एनसीआरबी के आंकड़ों की मानें तो 21.7% दोषी दलित जेलों में बंद हैं। अगर आदिवासियों की बात करें, तो दोषी कैदी 13.6% और 10.5% कैदी अंडर ट्रायल हैं। जबकि, इनकी कुल आबादी देश में 8.6% है। ओबीसी से ताल्लुक रखने वाले 34.9% दोषी जेलों में कैद हैं, जबकि इनकी आबादी 40% के आसपास है। जबकि, बाकी दूसरी जातियों का आंकड़ा 29.6% है। मुस्लिम वर्ग की बात करें त...

व्यापार चलाने को कर्ज लिया था और लॉकडाउन लग गया, फाइनेंसर बाउंसर भेजने लगा, वो गाली देते और घर तबाह करने की धमकी देते थे

दोनों भाइयों में बड़ा प्यार था। आस-पड़ोस से लेकर नाते-रिश्तेदार भी उन्हें राम-लक्ष्मण कहते थे। जो बड़ा कहता, वही छोटा वाला करता। हर काम में साथ-साथ। सुबह, शाम और दोपहर बस काम-काम और काम। इसी काम ने मेरे दोनों लालों को हमसे छीन लिया। दोनों भाई एक साथ चले गए। ये भी नहीं सोचा कि उनके बाद हमारा क्या होगा? बच्चों का क्या होगा?’ इतना कहते-कहते 78 साल के अधेश्वर दास गुप्ता कांपने लगते हैं। बगल में खड़ी उनकी पत्नी सहारे के लिए हाथ आगे बढ़ाती हैं। उनकी पत्नी का नाम उषा है और उम्र 72 साल है। अधेश्वर दास के होंठ कंपकपा रहे हैं। वो कुछ बोल रहे हैं, लेकिन गले से आवाज नहीं निकल रही। उनकी सूनी आंखें सामने दीवार पर टिकी हैं। सुधबुध गंवा चुके पति को सहारा देकर बैठाने के बाद उषा कहती हैं, 'बच्चों को हमारी इतनी भी चिंता नहीं करनी चाहिए थी। वो डरते थे कि कहीं पैसा मांगने वाले लोग हमारे बूढ़े मां-बाप को ना कुछ बोल दें। इज्जत की फिक्र थी। कितने कष्ट में रहे होंगे हमारे लाल कि एक साथ फांसी लगा ली?' दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में जिन दो सगे भाइयों ने एक साथ आत्महत्या की, उनके माता-पिता। इतना कहक...

चीनी हवाला ऑपरेटर का बॉलीवुड कनेक्शन, भारत में फ्लॉप फिल्मों के चीन में हिट होने का क्या है राज

सुशांत सिंह राजपूत तो चले गए, लेकिन पीछे वो बॉलीवुड छोड़ गए हैं, जो अगर अभी रो-बिलख नहीं रहा है, तो जल्द ही रोता-बिलखता नजर आ सकता है। न जाने कितने एंगल खुलकर सामने आ गए हैं। बात असामान्य मृत्यु से शुरू हुई और भाई-भतीजावाद, ड्रग्स और माफिया कनेक्शन होती हुई अब चीन पहुंच चुकी है। जी हां, चीन में प्रति वर्ष 40 भारतीय फिल्मों को प्रदर्शित करने की अनुमति है, लेकिन बॉलीवुड में भारी भरकम और संदिग्ध चीनी निवेश का पता चला है। दो हवाला ऑपरेटर पहचाने जा चुके हैं। रडार पर कुछ फिल्मी हस्तियां भी हैं, जिनकी फिल्में भारत में असफल रही हैं, लेकिन चीन ने इन्हें हिट बता कर उनकी झोली जमकर भर दी है। कंगना रनौत आएं बीजेपी में! अब जब हर तरह की बात चल रही है, तो यह सवाल भी उठेगा कि क्या कंगना रनौत बीजेपी में शामिल हो सकती हैं? दरअसल सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर 6 अगस्त को एक समारोह आयोजित हुआ। समारोह पूरी तरह संघ परिवार का था। इसे संस्कार भारती पूर्वोत्तर और संस्कृति गंगा न्यास द्वारा आयोजित किया गया था। प्रसून जोशी इसमें मौजूद थे। लेकिन सुपर डुपर हिट उपस्थिति थी कंगना की। कंगना 2019 में शपथ ग्रहण समारोह ...

जीवन में जब भी कोई विपरीत परिस्थिति आए, रामजी की तरह इंद्रियों पर नियंत्रण और ईश्वर के प्रति भरोसा जरूर बनाए रखिएगा

जीवन में संकट किसी पर भी आ सकता है। देखिएगा, जब भी कोई विपरीत परिस्थिति आती है, हम किसी दिक्कत में होते हैं तो हमारे प्रति लोगों का व्यवहार चार तरीके का रहता है- सहानुभूति, सलाह, सहयोग और आलोचना। हमें संकट में पड़ा देखकर कभी-कभी लोग यह भी कह सकते हैं कि हमने तो पहले ही कहा था, आप ही ने ध्यान नहीं दिया। ऐसे समय दो बातें न छोड़ें- भगवान पर भरोसा और इंद्रियों पर नियंत्रण। संकट रामजी पर भी आया था। रावण से युद्ध के समय उन्हें पैदल देख देवताओं ने अपना रथ भेजा, जिसमें देवलोक के घोड़े जुते हुए थे। उन घोड़ों के लिए तुलसीदासजी ने लिखा है- ‘चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।’ रामजी जिस रथ पर चढ़े उसके चारों घोड़े बड़े चंचल, मनोहर, अजर-अमर और मन की गति के समान चलने वाले थे। इंद्रियों को घोड़े जैसा बताया गया है। यहां तुलसीदासजी ने इंद्रियों के लक्षण बताए हैं कि वे चंचल होती हैं, अक्षय, अमर और मन की गति से भागती हैं। देखिए, घोड़े, इंद्रियां, मन इन सबको जोड़ दिया गया है और रामजी ने इनका उपयोग युद्ध के समय हंसते हुए किया। यह पूरी घटना, पूरा दृश्य हमें बताता है कि जीवन में जब भी कोई विपरीत ...

गुजिश्ता जंग में तो घर बार ही जले, अजब नहीं ये तनहाइयां भी जल जाएं, गुजिश्ता जंग में तो पैकर ही जले, अजब नहीं इस बार परछाइयां भी जल जाएं

एक सितंबर 1939 को दूसरे विश्वयुद्ध का प्रारंभ हुआ। ज्ञातव्य है 1929 से 1933 वैश्विक आर्थिक मंदी का भयावह दौर था। इसी दौर में हिटलर ने जर्मनी में हथियार बनाने के कारखाने खोले व लोगों को काम मिला। हिटलर के प्रचार मंत्री गोएबल्स ने कहा कि एक झूठ को सौ बार कहने से अवाम को वह सच लगने लगता है। मंदी में नौकरियां देने से हिटलर की लोकप्रियता बढ़ी। इस विश्वयुद्ध में अमेरिका का धन लगा, इंग्लैंड के विंस्टन चर्चिल ने नीतियां बनाईं व युद्ध में सबसे अधिक संख्या में रूसी सैनिक मरे। पर युद्ध में पोलैंड ने निर्णायक भूमिका अदा की। हिटलर को लगा कि नन्हें पोलैंड वह सप्ताह में परास्त करके, फौज रूस की ओर बढ़ेगी। परंतु पोलैंड के नागरिकों ने मोहल्ला दर मोहल्ला युद्ध कर उसे 11 सप्ताह में परास्त किया। इसी कारण हिटलर की सेना और उस पर आक्रमण करने में देर हुई और भयावह रूसी सर्दी में हिटलर की सेना फंस गई। रूस में ‘बेलाड ऑफ ए सोल्जर’ और ‘क्रेन्स आर फ्लाइंग’ जैसी महान फिल्में बनीं। ‘बेलाड ऑफ ए सोल्जर’ के नायक को सरहद पर विशेष साहस प्रदर्शन से इनाम में 1 सप्ताह की छुट्टी मिली। साथी उससे उनके परिवारों की खोज खबर लेने...

आंत्रप्रेन्योर बनना चाहते हैं तो जितना संभव हो उतनी जानकारियां इकट्‌ठी करें, आप जो उत्पाद बनाना चाहते हैं उसे महसूस करें

अ गर आप आंत्रप्रेन्योर बनना चाहते हैं तो ये तीन शुरुआती मंत्र याद रखें। 1. किसी बिजनेस आइडिया में आपकी रुचि है तो सभी संभव जानकारियां खोजें। 2. आपको किसी उत्पाद की गुणवत्ता के चरण का अनुभव करना चाहिए, जैसा उसका स्वाद कैसा है, वह कैसा दिखता है। 3. भले ही आपको इसे खुद न बनाना हो, फिर भी आपको उत्पादन प्रक्रिया पता होनी चाहिए। ये रही कुछ जानकारी। विवरण खोजें: इस सोमवार सुबह, कॉलेज के एक लड़के ने मुझसे संपर्क किया और पूछा कि उसे ऐसा व्यक्ति कहां मिलेगा जो टॉय इंडस्ट्री की सामान्य जानकारी दे सके। मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि लंबे समय बाद किसी ने कुछ ‘हटके’ पूछा था। उसे यह आइडिया प्रधानमंत्री मोदी की ‘मन की बात’ से आया, जिसमें उन्होंने स्टार्टअप्स और आंत्रप्रेन्योर्स से घरेलू मांग पूरी करने के लिए ‘भारत के और भारत के लिए, खिलौने और गेम्स’ विकसित करने कहा। फिर मैंने उससे ‘चन्नापट्‌टना’ गूगल करने को कहा, जो कर्नाटक के रामानगरम जिले में एक शहर है, जिसे ‘टॉय सिटी’ का दर्जा प्राप्त है। मैंने उसे बताया कि 2011 की जनगणना के हिसाब से वहां 254 होम मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट और 50 से ज्यादा छोटी फैक्टरी हैं ज...

प्रशांत भूषण 1 रुपया जुर्माना देकर बच गए; लेकिन जानिए कोर्ट पर कोई भी टिप्पणी आपको कैसे जेल पहुंचा सकती है

सुप्रीम कोर्ट ने कन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट मामले में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण पर एक रुपए का जुर्माना लगाया है। यदि 15 सितंबर तक जुर्माना नहीं भरा तो तीन महीने की जेल होगी। तीन साल के लिए वकालत छूट जाएगी, वो अलग। प्रशांत भूषण देश के नामी वकील हैं। सोशल मीडिया पर कोर्ट या जजों पर टिप्पणी करने का क्या नतीजा निकल सकता है, जानते-समझते हैं। उन्होंने केस लड़ भी लिया। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि कोर्ट, खासकर सुप्रीम कोर्ट या किसी भी हाईकोर्ट के किसी फैसले की आलोचना या विरोध आपको जेल पहुंचा सकता है। चलिए, बात करते हैं क्या होता है कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट और इसकी प्रक्रिया क्या होती है? और, हमें कोर्ट के किसी भी फैसले पर बिना सोचे-समझे सवाल क्यों नहीं उठाने चाहिए? सबसे पहले, क्या है कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट? कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट को यदि सरल भाषा में कहें तो आपने कोर्ट का अपमान किया है। उसके फैसले की आलोचना कर या ठुकराकर उसके सम्मान को ठेस पहुंचाई है। सदियों पहले, इंग्लैंड में यह कंसेप्ट आया था। उस समय राजा या उसकी ओर से नियुक्त जजों का सम्मान जरूरी था। जजों के फैसले की अवहेलना को राजा का अपमान माना जाता ...

Jio Fiber free trial: 1 सितंबर से नए यूजर्स को पूरे 30 दिन फ्री मिल रहा जियो फायबर, जानिए क्या है प्लान

यदि 30 दिन बात सेवा पसंद नहीं आता है तो लौटा सकते हैं। कंपनी की ओर से ग्राहक से कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। from Nai Dunia Hindi News - technology : mobile https://ift.tt/3basPE6

सुरेश रैना के हटने से चेन्नई की टीम पर क्या असर पड़ेगा? टीम में बदल सकता है इन खिलाड़ियों का रोल

सुरेश रैना इस बार आईपीएल में नजर नहीं आएंगे। वो यूएई से देश लौट चुके हैं। तीन बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स के लिए ये बड़ा झटका है। धोनी के बाद रैना चेन्नई सुपर किंग्स के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। रैना के चेन्नई की टीम में नहीं होने के क्या मायने हैं? चेन्नई जब-जब चैंपियन बनी उसमें रैना का क्या रोल रहा?आइए जानते हैं। चेन्नई के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज आईपीएल में रैना ने अब तक 193 मैच में 5,368 रन बनाए हैं। पिछले 12 में से दस सीजन उन्होंने चेन्नई के लिए खेले हैं। तीन नंबर पर रैना स्थिति के हिसाब से रनों की गति बढ़ाने की काबिलियत रखते हैं। यही बात उन्हें बाकी बल्लेबाजों से अलग करती हैं। जबकि, टीम के पास फॉफ डु प्लेसी, अंबाती रायुडू, मुरली विजय, शेन वॉटसन जैसे बल्लेबाज हैं। आईपीएल इतिहास में रैना सबसे ज्यादा बनाने वालों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं। उनसे आगे सिर्फ आरसीबी के कप्तान विराट कोहली हैं। कोहली ने अब तक 177 मैचों में 5,412 रन बनाए हैं। लेकिन रैना का स्ट्राइक रेट कोहली से बेहतर है। कोहली ने जहां 131.61 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं। वहीं, रैना ने ...

पड़ोसी देशों को खुश करने के लिए भारत की कोविड-19 वैक्सीन डिप्लोमेसी; पांच सूत्री एजेंडे पर चल रहा है काम

भारत में इस समय कोरोनावायरस को काबू करने के लिए तीन वैक्सीन बनाने पर काम चल रहा है। दो स्वदेशी वैक्सीन हैं और एक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी/एस्ट्राजेनेका की ओर से विकसित, जिसके ट्रायल्स सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है। पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन बनाने वाले देश के तौर पर भारत ने संकट में भी अवसर देखते हुए वैक्सीन डिप्लोमेसी पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत पांच रास्ते निकाले हैं। उन पर काम चल रहा है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों को फ्री वैक्सीन देने से लेकर पश्चिम एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को वैक्सीन पहुंचाना तक शामिल है। केंद्र सरकार से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक प्लान अभी अंतिम रूप ले रहा है। उदाहरण के लिए भारत वैक्सीन सप्लाई के लिए यदि एक प्लेटफार्म बनाता है तो उसे लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स का ध्यान रखना होगा। उसके आधार पर ही तय होगा कि वैक्सीन को कहां बेचा जाएगा और कहां नहीं। इसके लिए नीति आयोग के डॉ. वीके पॉल की अध्यक्षता में वैक्सीन पर बने एक्सपर्ट ग्रुप की सलाह ली जा रही है। जब यह प्लान फाइनल हो जाएगा तो संभावित हितग्राहियों से एग्रीमेंट्स को ...